Posts

Showing posts from October, 2017

↟↟↟ !!! Empower your Soul to do better in Worst Conditions !!! ↟↟↟

Image
Dear All, Once i was reading an article that was taken from "Bhagwad - Geeta" it was a very beautiful line i ever read:- अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च । निर्ममो निरहङ्‍कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥ (१३) सन्तुष्ट: सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चय: | मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्त: स मे प्रिय: || 14|| भावार्थ  : जो मनुष्य किसी से द्वेष नही करता है, सभी प्राणीयों के प्रति मित्र-भाव रखता है, सभी जीवों के प्रति दया-भाव रखने वाला है, ममता से मुक्त, मिथ्या अहंकार से मुक्त, सुख और दुःख को समान समझने वाला, और सभी के अपराधों को क्षमा करने वाला है। (१३) भावार्थ  : जो मनुष्य निरन्तर भक्ति-भाव में स्थिर रहकर सदैव प्रसन्न रहता है, दृढ़ निश्चय के साथ मन सहित इन्द्रियों को वश किये रहता है, और मन एवं बुद्धि को मुझे अर्पित किए हुए रहता है ऎसा भक्त मुझे प्रिय होता है। (१४) BG 12.13-14 :  Those devotees are very dear to me who are free from malice toward all living beings, who are friendly, and compassionate. They are free from attachment to possessions and egotism, equipoised i...